Showing posts with label सरकर. Show all posts
Showing posts with label सरकर. Show all posts

Friday, May 4, 2018

जजों की नियुक्ति पर विवाद: कॉलेजियम भेज रहा है कम नाम- एजी; कोर्ट ने कहा- सरकार सिफारिशें दबाकर बैठी

[ad_1]

. जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर सरकार और न्यायपालिका के बीच जारी विवाद शुक्रवार को काफी तल्ख हो गया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (एजी) ने केंद्र की ओर से कॉलेजियम को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के खाली पद भरने के लिए बहुत कम नामों की सिफारिश की जा रही है।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

[ad_2]

Source link

भारत में 85% घरों तक बिजली पहुंची, यहां अच्छा काम हुआ: वर्ल्ड बैंक; सरकार ने 80% का दावा किया था

[ad_1]

वाशिंगटन. वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बिजली के लिए भारत में शानदार काम हो रहा है। देश की 85% आबादी तक बिजली पहुंच चुकी है। खास बात ये है कि सरकार अभी 80% घरों में बिजली पहुंचने का दावा कर रही है, लेकिन वर्ल्ड बैंक ने इसे 5% ज्यादा बताया है। 2010 से 2016 के बीच भारत में हर साल 3 करोड़ लोगों को बिजली उपलब्ध करवाई गई जो कि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा है।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

[ad_2]

Source link

Thursday, May 3, 2018

ट्रिपल तलाक को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है सरकार, अगली कैबिनेट बैठक में हो सकता है फैसला

[ad_1]

नई दिल्लीः संसद में ट्रिपल तलाक बिल के अटकने के लेकर केंद्र की मोदी सरकार बड़ा फैसला करने जा रही है. ऐसी खबर है कि सरकार ट्रिपल तलाक पर अध्यादेश ला सकती है और सरकार ने इसके लिए पूरी तैयारी भी कर ली है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ट्रिपल तलाक को लेकर चर्चा की गई थी. आपको बता दें कि ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा में अटका हुआ है. यह बिल लोकसभा में पारित किया जा चुका है. मुस्लिम समाज में ट्रिपल तलाक की प्रथा को सुप्रीम कोर्ट ने भी असंवैधानिक करार दिया है. कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार द्वारा इस बिल को संसद में लाने का मुस्लिम महिलाओं ने स्वागत किया था.


बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक के बाद ऐसा माना जा रहा है कि कैबिनेट की अगली बैठक में ट्रिपल तलाक को लेकर सरकार अध्यादेश ला सकती है. ऐसी खबर है कि इस अध्यादेश में वही प्रावधान होंगे जो कि प्रस्तावित कानून और लोकसभा से पास हो चुके विधेयक में हैं.


शाही इमाम ने AIMPLB को निशाने पर लिया
दिल्ली में 4 अप्रैल को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदर्शन के विरोध में दिल्ली के शाही इमाम, मौलाना सैयद अहमद बुखारी ने कहा था कि लॉ बोर्ड अपना जुर्म छिपाने के लिए मुस्लिम महिलाओं का गलत इस्तेमाल कर रहा है. महिलाओं के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि इससे नई बिद्दत का जन्म हो रहा है. शाही इमाम के इस बयान को लेकर देवबंदी उलेमाओं ने कहा कि यह जगजाहिर है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शाही इमाम के आपसी ताल्लुक ठीक नहीं है. महिलाओं के प्रदर्शन का सुन्नत और बिद्दत से कोई लेना-देना नहीं है. देवबंदी उलेमाओं ने कहा कि इस तरह मुस्लिम महिलाओं का सड़कों पर उतरना इस्लामिक इतिहास में अब तक नहीं हुआ है.


सरकार पर शरियत में हस्तक्षेत्र का आरोप
बता दें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार तलाक-ए-बिद्दत को लेकर कानून लेकर आ रही है. ट्रिपल तलाक विधेयक को लोकसभा से मंजूरी भी मिल चुकी है. हालांकि, अभी तक इसे उच्च सदन (राज्यसभा) से मंजूरी नहीं मिली है. इस कानून को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का आरोप है कि सरकार कानून के नाम पर शरियत में हस्तक्षेप कर रही है. पर्सनल लॉ बोर्ड का यह भी आरोप है कि सरकार का मकसद कॉमन सिविल कोड थोपने की है, तीन तलाक पर कानून तो महज दिखावा है. तमाम विपक्षी दल भी तीन तलाक पर कानून के विरोध में है.


सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत को माना अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत, मतलब एक साथ तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में रखा है. कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को गैर कानूनी माना और कानून बनाने की अपील की. तीन तलाक को लेकर जिस विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिली है, उसके मुताबिक एक बार में तीन तलाक देना गैर-कानूनी और अमान्य होगा. आरोप साबित होने के बाद पति को तीन साल तक की सजा हो सकती है. इसके अलावा तलाक-ए-बिद्दत को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है. 




[ad_2]

Source link

Centre tells SC| केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- आधार को जोड़ना एक अंतरिम उपाय

[ad_1]





अटॉर्नी जनरल ने सरकार के आदेश के पृष्ठ-दो का संदर्भ दिया, जिसमें कहा गया है कि फैसला आने के वक्त तक आधार को जोड़ना अंतरिम उपाय रहेगा.





केंद्र सरकार ने SC से कहा- सिमकार्ड लेने के लिए आधार को जोड़ना एक अंतरिम उपाय

(फाइल फोटो)







[ad_2]

Source link

सिंधिया ने किया शिवराज सरकार पर सवाल, मुख्‍यमंत्री बोले- कुछ लोग सिर्फ चुनाव के समय आते हैं नजर

[ad_1]

इंदौर: मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक ही कक्ष में महिलाओं की मौजूदगी में पुरुष नव आरक्षकों (कांस्टेबल) के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कपड़े उतरवाने को कांग्रेस की प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शर्मनाक कृत्य करार दिया है. सिंधि‍या ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश में एक बार फिर सरकारी नुमाइंदों ने लापरवाही की हदें पार की. महिलाओं के सामने पुरुष के कपड़े उतरवाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया. घोर निंदनीय कृत्य, बेहद शर्मनाक. 


सिंधिया के इस ट्वीट के बाद ही मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि कुछ नेता प्रदेश में सिर्फ़ चुनाव के समय दिखते है, बाक़ी समय अपने तुगलकी महलों में बिताते हैं. उनको लगता है कि कॉमन मैन को क्या पता चलेगा.एक फ़िल्म में मैंने सुना था, “नेवर अंडरेस्टिमेट द पावर ऑफ कॉमन मैन...” जनता को पता है कि कौन उनके साथ हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा. 



बता दें कि भिंड में नव आरक्षकों का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण चल रहा था.  उस दौरान एक ही कक्ष में अर्धनग्न स्थिति में पुरुष और दूसरी ओर महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण चलता रहा. महिला नव आरक्षकों के सामने ही पुरुषों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कपड़े उतरवाए गए. इससे पहले धार जिले में आरक्षित वर्ग के नव आरक्षकों के सीने पर स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान एससी और एसटी लिख दिया गया था. इस मामले ने तूल पकड़ा था जिसके बाद प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए. 




[ad_2]

Source link

Wednesday, May 2, 2018

जस्टिस जोसेफ मामले में सरकार की सफाई, नाम वापसी का उत्तराखंड फैसले से कोई संबंध नहीं

[ad_1]

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ की पदोन्नति की सिफारिश थी, लेकिन केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की इस सिफारिश को ठुकरा दिया था. इस पर सरकार ने सफाई दी है कि सिफारिश ठुकराने के पीछे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का मामला कतई नहीं है. सरकार ने बुधवार को इस बात को खारिज कर दिया कि उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की सुप्रीम में नियुक्ति के प्रस्ताव को उसने इसलिए ठुकरा दिया कि उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को पलट दिया था.


कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों से सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकती है. प्रसाद ने कहा कि वह पूरे अधिकार के साथ इस बात से इनकार करते हैं कि इसका उससे कोई लेना-देना है. उन्होंने कहा कि अपने रूख का समर्थन करने के लिए उनके पास दो स्पष्ट कारण हैं.


यह भी पढ़ें- जस्टिस जोसेफ की पदोन्नति पर फैसला टला, कॉलेजियम की बैठक रही बेनतीजा


कानून मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में तीनचौथाई बहुमत के साथ सरकार चुनी गई है. दूसरा, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेएस खेहर ने उस आदेश (न्यायमूर्ति जोसेफ) की पुष्टि की थी. न्यायमूर्ति खेहर ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून को भी खारिज कर दिया था. इसके बाद भी वह राजग सरकार के कार्यकाल में प्रधान न्यायाधीश बने. 
प्रसाद ने न्यायपालिका के संबंध में पूर्व प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया और कहा वह सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे. 


सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति जोसेफ की नियुक्ति को रोकने के फैसले के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में प्रसाद ने कहा कि सरकार के खिलाफ प्रायोजित आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आमतौर पर और विशेष रूप से कांग्रेस द्वारा सरकार के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन संबंधी उनके फैसले को लेकर उनकी नियुक्ति को रोका गया.


बता दें कि सरकार ने 26 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम से कहा था कि वह न्यायमूर्ति जोसेफ के संबंध में अपनी सिफारिश पर पुनर्विचार करे. 




[ad_2]

Source link