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Friday, May 4, 2018

VIDEO : म‍िलि‍ए जरा दूजे क‍िस्‍म के ट्रैफि‍क वाले से, जो गाने गाकर लाेगों को बताता है न‍ियम

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ट्रैफि‍क नियमों को लेकर देश में लोग कितने बेपरवाह हैं, ये बात किसी से छिपी नहीं है. आए दिन सामने आने वाले आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि देश में ट्रेफि‍क नियमों में लापरवाही के कारण कितने लोग हादसों का शिकार बनते हैं.




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म्यांमार: पत्थर की खदान में भूस्खलन, 17 लोगों की मौत

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यांगून: म्यांमार के उत्तरी क्षेत्र में बेशकीमती पत्थर की एक खदान में चट्टान खिसकने से 17 लोगों की मौत हो गई. यह घटना बेशकीमती पत्थर हरिताश्म की खुदाई के दौरान हुई. दुनिया में सबसे ज्यादा म्यांमार में इस पत्थर का खनन होता है और पड़ोसी चीन से इसकी सबसे ज्यादा मांग आती है. हालांकि, इस उद्योग का सही से नियमन नहीं होने के कारण इसे निकालने में बड़ा जोखिम रहता है. यह घटना कचीन प्रांत स्थित हपकांत टाउनशिप के वाक खार गांव के निकट खदान परिसर में हुई . स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी निलर म्यिंट ने बताया, ‘‘हरिताश्म निकाले जाने के दौरान चट्टान गिर गयी. ’’ उन्होंने बताया कि अब तक 17 शव मिले हैं और सात घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. राहत और बचाव अभियान में जुटे एक अन्य सूत्र ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की. 


थाइलैंड में बस में लगी आग, म्यांमार के 20 कामगारों की मौत
थाइलैंड के सीमावर्ती शहर से बैंकॉक जा रही एक बस में आग लगने से उसमें सवार म्यांमार के 20 प्रवासी कामगारों की शुक्रवार (30 मार्च) को मौत हो गई. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बस में आग कैसे लगी. टेलीविजन फुटेज में आग में जली एक बस और उसके भीतर फंसे लोग दिखाई दिए. ताक डिजास्टर प्रिवेंशन एंड मिटिगेशन सेंटर के पोलावत सैप्सोंगसुक ने कहा, ‘‘मृतकों की संख्या 20 है और तीन लोग घायल हैं.’’ ताक प्रांत में एक बचावकर्मी ने संवाददाताओं को बताया कि बस में 47 लोग सवार थे.


थाइलैंड बस दुर्घटना में 18 की मौत
इससे पहले थाइलैंड के पूर्वोत्तर इलाके में एक बस दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हो गई और 32 लोग घायल हो गए थे. यह दुर्घटना नाखौन राचासीमा प्रांत के वांग नाम खियो जिले में बुधवार (28 मार्च) रात को एक ढलान के मोड़ पर हुई थी. अधिकारियों के अनुसार, बस चालक ने वाहन से अपना नियंत्रण खो दिया, जिस वजह से वाहन उल्टे लेन में प्रवेश कर सड़क से बाहर हो गई. बस में 50 लोग सवार थे, जिसमें से 16 की मौके पर ही मौत हो गई और दो अन्य की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई. बस में कालासिन प्रांत के पर्यटकों का समूह सवार था जो चांटाबुरी के तटीय इलाके से वापस घर लौट रहा था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, थाइलैंड की सड़क दुनिया में सबसे खतरनाक सड़कों में दूसरे स्थान पर है और यहां प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटना में लगभग 24,000 लोगों की मौत हो जाती है.


इनपुट भाषा से भी 




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जीएसटी: 6 महीने में लागू होगी मंथली सिंगल रिटर्न व्यवस्था, डिजिटल पेमेंट पर छूट पर नहीं हुआ फैसला

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नई दिल्ली. जीएटसी काउंसिल की बैठक में व्यापारियों के लिए सिंगल रिटर्न की व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया गया। मंथली सिंगल रिटर्न की व्यवस्था 6 महीने में लागू हो जाएगी, जिसके बाद कारोबारियों को तीन रिटर्न भरने से राहत मिलेगी। शुक्रवार को हुई काउंसिल की बैठक में चीनी पर सेस लगाने और डिजिटल पेमेंट पर टैक्स में छूट के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो पाया। हालांकि, फिलहाल चीनी पर सेस नहीं लगाया जाएगा। दोनों मामले राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह को सौंप दिए गए हैं। जीएसटी 27वीं बैठक में जीएसटी नेटवर्क को सरकारी कंपनी बनाने पर भी फैसला लिया गया है। इसके तहत 50% हिस्सेदारी केंद्र के पास और 50% हिस्सेदारी संयुक्त रूप से राज्यों के पास रहेगी।


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संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस नहीं सह पाई यात्रियों का बोझ, ट्रेन से खींचकर बाहर निकाले गए लोग

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बिहार जाने वाली लगभग सभी ट्रेनों के देरी से चलने की वजह से सैकड़ों की संख्‍या में यात्री इस ट्रेन की जनरल बोगियों में सवार हो गए. ट्रेन के रवाना होने से पहले रेलवे स्टॉफ ने रूटीन जांच के तहत ट्रेन के बोगियों का वेट प्रेशर जांचना शुरू किया.





संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस नहीं सह पाई यात्रियों का बोझ, ट्रेन से खींचकर बाहर निकाले गए लोग

दिल्ली से पटना जाने वाले यात्री राजधानी एक्सप्रेस के बाद इसी ट्रेन को तवज्जो देते हैं.







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Bjp Facing Self Goal By Own Leaders On Dalit Issue - दलितों को साधने की बीजेपी की रणनीति पर उसी के मंत्री- सांसद लगा रहे पलीता

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दलितों पर राजनीति कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से दलित कार्ड राजनीति का प्रमुख एजेंडा रहा है और बात जब चुनाव में मतदाताओं को लुभाने की हो तो यह कार्ड आन-बान की बात हो जाती है। दलित विरोधी छवि से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी दलितों को प्रभावित करने का हर दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। 

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि जहां और दलित विरोधी बन रही है वहीं मोदी सरकार के मंत्री अपने सरकार की छवि सुधारने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

लेकिन कोई भी दलित कार्ड काम नहीं आ रहा है। चाहें दलितों के घर जाकर खाना खाने का हो या फिर उनके घर सोने का या बात करें उनके साथ उनकी परेशानियों को जानने का,भाजपा मंत्रियों का सारा दांव उल्टा ही पड़ता जा रहा है।

भाजपा के मंत्री, विधायक और सांसद अपने बयानों और गतिविधियों से सरकार की फजीहत करा रहे हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी जहां दलितों तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रही है, वहीं उनके नेता गलतियां कर न सिर्फ विवादों में घिर रहे हैं, बल्कि जाति के पुर्वाग्रह को भी मजबूत करते दिख रहे हैं।

मामला उत्तर प्रदेश का है जहां योगी सरकार के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने खुद को और बीजेपी नेताओं की तुलना भगवान राम से कर दी है, जो दलितों के घर जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं।

वहीं, योगी सरकार में एक और मंत्री सुरेश राणा ने अलीगढ़ में दलित के घर बाहर से लाए गये शाही भोजन और मिनरल वाटर के साथ खाना खाकर इसे एक और नई परिभाषा दे दी है। योगी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी दलितों के यहां खाने को लेकर एक हास्यास्पद बयान दे डाला है उन्होंने कहा- मच्छर काटने के बावजूद मंत्री दलितों के घर रुक रहे हैं। 
दलितों पर हो रही राजनीति से आहत बीजेपी के दलित सांसद उदित राज ने मंत्रियों की इन हरकतों को शर्मनाक और  ऐसी घटनाओं को दलित समुदाय के लिए अपनामजनक बताया है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के दलितों का मानना है कि यह उन्हें नीचा दिखाता है। उदित राज ने कहा कि मैं बीजेपी के प्रवक्ता के रूप में नहीं बोल रहा हूं बल्कि एक दलित के रूप में बोल रहा हूं। मैं इसका समर्थन नहीं करता हूं कि एक सवर्ण दलित के घर यह बोलने जाता है कि देखो वे नीच हैं और दूसरे ऊंचे हैं। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी भाजपा के मंत्रियों को दलितों के घर में खाना खाने का दिखावा करने से बचने की सलाह दी है। संघ के प्रचार प्रमुख डॉ मनमोहन वैद्य ने कहा, "पीएम मोदी ने नेक नीयती से दलितों के कल्याण की मुहिम चलाई थी लेकिन पार्टी नेताओं ने उनकी विचार धारा को ही नष्ट कर दिया है।" 

उन्होंने कहा कि 'संघ सदियों से नवरात्रि के समय दलित बालिकाओं को अपने घर पूजते आ रहे हैं लेकिन कभी दिखावा नहीं किया।' संघ से पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी 'दलितों के लिए आयोजित भोज में शामिल होने से यह कह कर मना कर दिया कि वह भगवान राम नहीं हैं, जो दलितों के साथ भोजन कर उन्हें पवित्र कर देंगी।' 

वहीं, बहराइच की भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने नेताओं के दलितों के घर भोजन करने को लेकर सवाल उठाए और उन (नेताओं) के इस कृत्य को दलितों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि ये जो परंपरा चल रही है, उसमें दलित वर्ग का सिर्फ अपमान हो रहा है। नेता दलित के घर खाना खाने जाते हैं लेकिन खाना बनाने वाला कोई और होता है, परोसने वाला कोई और...। बर्तन टेंट हाउस के होते हैं। 


दलितों पर राजनीति कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से दलित कार्ड राजनीति का प्रमुख एजेंडा रहा है और बात जब चुनाव में मतदाताओं को लुभाने की हो तो यह कार्ड आन-बान की बात हो जाती है। दलित विरोधी छवि से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी दलितों को प्रभावित करने का हर दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। 


पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि जहां और दलित विरोधी बन रही है वहीं मोदी सरकार के मंत्री अपने सरकार की छवि सुधारने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

लेकिन कोई भी दलित कार्ड काम नहीं आ रहा है। चाहें दलितों के घर जाकर खाना खाने का हो या फिर उनके घर सोने का या बात करें उनके साथ उनकी परेशानियों को जानने का,भाजपा मंत्रियों का सारा दांव उल्टा ही पड़ता जा रहा है।

भाजपा के मंत्री, विधायक और सांसद अपने बयानों और गतिविधियों से सरकार की फजीहत करा रहे हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी जहां दलितों तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रही है, वहीं उनके नेता गलतियां कर न सिर्फ विवादों में घिर रहे हैं, बल्कि जाति के पुर्वाग्रह को भी मजबूत करते दिख रहे हैं।

मामला उत्तर प्रदेश का है जहां योगी सरकार के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने खुद को और बीजेपी नेताओं की तुलना भगवान राम से कर दी है, जो दलितों के घर जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं।

वहीं, योगी सरकार में एक और मंत्री सुरेश राणा ने अलीगढ़ में दलित के घर बाहर से लाए गये शाही भोजन और मिनरल वाटर के साथ खाना खाकर इसे एक और नई परिभाषा दे दी है। योगी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी दलितों के यहां खाने को लेकर एक हास्यास्पद बयान दे डाला है उन्होंने कहा- मच्छर काटने के बावजूद मंत्री दलितों के घर रुक रहे हैं। 





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दलितों के घर में खाना खाने का दिखावा करने से बचने की सलाह दी है







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Thursday, May 3, 2018

ट्विटर के सिस्टम में आई गड़बड़ी, कंपनी ने 33 करोड़ लोगों से फौरन पासवर्ड बदलने के लिए कहा

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ट्विटर ने गुरुवार को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने करीब 33 करोड़ यूजर्स से तुरंत पासवर्ड बदलने के लिए कहा है। कंपनी ने अपने आधिकारिक हैंडल से भी इसकी जानकारी दी है। ट्विटर ने कहा है कि हाल ही में उसके सॉफ्टवेयर में एक बग आ गया था, जिसकी वजह से यूजर्स के पासवर्ड असुरक्षित हो गए थे। हालांकि कंपनी का दावा है कि परेशानी सुलझा ली गई है और यूजर्स के डेटा से किसी भी तरह की छेड़छाड़ या गलत इस्तेमाल की बात सामने नहीं आई है।


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लोग नेताओं के ऑफिस के निकट प्रदर्शन के लिए क्यों नहीं आ सकते : सुप्रीम कोर्ट

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लोगों के प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता देने वाले सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसले हैं. 




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