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Friday, May 4, 2018

क्या सच में शिवराज सिंह चौहान की जगह नया चेहरा लाएगी बीजेपी?

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भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि 'मेरी खाली कुर्सी पर अब काई भी बैठ सकता है' उसके मायने निकाले जा रहे हैं. हालांकि शिवराज ने यूटर्न लेते हुए अपने बयान को 'मजाक' बताया था लेकिन सच तो यह है कि पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में उनकी जगह नए चेहरे को लाने पर तेजी से मंथन चल रहा है. कोशिश चल रही है कि साफ छवि वाला, संघ का करीबी, सभी वर्गो और नेताओं में गहरी पैठ बनाने वाले किसी युवा चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जाए.


पार्टी और संघ फैसला जल्दी लेने का मन बना चुका है, क्योंकि अगर देर हुई तो शिवराज के चेहरे पर ही पार्टी को अगला चुनाव लड़ना होगा. पार्टी को लगता है कि नए चेहरे से कांग्रेस 15 साल का हिसाब भी नहीं मांग पाएगी और यह भी संभव है कि नया चेहरा देख जनता व्यापम से लेकर आरती घोटाले तक को भूल जाए. किसान आत्महत्याओं, किसान गोलीकांड और भावांतर के भंवर पर पर्दा डालने में भी नया चेहरा मददगार साबित हो. 


उधर, कांग्रेस ने भी चुनाव से पहले अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है. प्रदेश अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को बनाया गया है तो चुनाव प्रचार अभियान समिति का प्रमुख युवा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाया गया है. पिछले दिनों दोनों नेताओं के दौरे और मेगा रोड शो से कार्यकर्ता उत्साहित हैं.


सूत्रों का कहना है कि विभिन्न माध्यमों से आई सूचनाओं ने आरएसएस को राज्य के वर्तमान नेतृत्व पर विचार के लिए मजबूर किया है. उसी के चलते प्रदेशाध्यक्ष के पद पर नंदकुमार सिंह चौहान के स्थान पर राकेश सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब सत्ता के खिलाफ पनपे असंतोष की तोड़ खोजने का दौर जारी है. 


आरएसएस के सूत्रों का दावा है कि सत्ता में नेतृत्व परिवर्तन का मन बना लिया गया है, कई नामों पर चर्चा जारी है. अमित शाह का भोपाल दौरा भी इसी मसले को लेकर है. यह बात अलहदा है कि सत्ता और संगठन के लोग अभी इस बात को स्वीकार नहीं रहे हैं. केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत कह रहे हैं कि अगला चुनाव शिवराज के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और 'बच्चों के मामा' ही मुख्यमंत्री होंगे. बताते चलें कि दिल्ली से लौटे शिवराज ने गुरुवार को भोपाल में आनंद व्याख्यान में एक सांकेतिक बयान देकर बदलाव की चर्चाओं को और हवा दे दी थी. उन्होंने कहा था, "दुनिया में कुछ भी परमानेंट नहीं है, मुझे जल्दी जाना है, मेरी कुर्सी पर अब कोई भी बैठ सकता है." 


शिवराज के बयान पर राज्य की सियासत गरमा गई, कांग्रेस नेताओं ने तरह-तरह के ट्वीट किए. जब चौहान को लगा कि उनके बयान का बड़ा राजनीतिक मायने है, तो उन्हें कुछ घंटों बाद ही एक ट्वीट करके न केवल सफाई देनी पड़ी, बल्कि अपने बयान को ही मजाक करार दे दिया.


मुख्यमंत्री ने आनंद व्याख्यान में दिए बयान के लगभग पांच घंटे बाद ट्वीट किया था- "कार्यक्रम में मेरे लिए आरक्षित रखी गई कुर्सी को लेकर थोड़ा सा मजाक क्या कर लिया. कुछ मित्र अत्यंत आनंदित हो गए! चलो, मेरा आनंद व्याख्यान में जाना सफल हो गया."


पिछले दिनों आरएसएस सहित विभिन्न संस्थाओं ने चुनाव पूर्व सर्वेक्षण कराए हैं, जिसमें राज्य सरकार की स्थिति के संदर्भ में सकारात्मक संदेश नहीं मिले हैं. यही कारण है कि भाजपा और संघ की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. संघ के सूत्रों का कहना है कि अब से लगभग एक दशक पहले डंपर कांड ने जोर पकड़ा था, मगर कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी, उसके बाद व्यापम घोटाला आया, उससे भी सरकार और पार्टी उबर आई, मगर इस समय जारी रेत खनन ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अवैध रेत खनन बड़ा मुद्दा बन गया है. विभिन्न वर्गो को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. मुख्यमंत्री के आसपास के नौकरशाहों की छवि भी अच्छी नहीं है. साथ ही कई अन्य फैसलों ने भी सरकार की छवि को प्रभावित किया है. 


राजनीति के जानकारों का कहना है कि शिवराज का दिल्ली दौरा और उसके लौटते ही उनका 'खाली कुर्सी' वाला बयान यूं ही नहीं था, बल्कि भाजपा के भीतर चल रही जोड़-तोड़ की हकीकत उनकी जुबान से सार्वजनिक तौर पर सामने आ गई. शिवराज गंभीर नेता हैं, वे कभी भी हल्की बात नहीं करते. उनके बयान के निहितार्थ होते हैं, जिसे कांग्रेस ने तुरंत लपक लिया और आखिर में शिवराज को सफाई देनी पड़ी. 


पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बीच रामलाल के साथ मध्यप्रदेश का दौरा राजनीतिक हलचल की ओर इशारा करता है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मध्यप्रदेश पर भी पार्टी कोई फैसला ले सकती है, या फिर शिवराज के नेतृत्व में ही चुनाव में जा सकती है. ये दोनों विषय पार्टी हाईकमान और संघ के बीच दिवालघड़ी के पेंडुलम की तरह डोल रहे हैं. इसके बावजूद इतना तो तय है कि अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा निश्चिंत नहीं है, भले ही उसने 'अबकी बार 200 पार' का नारा दे दिया हो. 


(इनपुट IANS से)




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Thursday, May 3, 2018

MP: मुख्‍यमंत्री शिवराज का चौंकाने वाला बयान, क्‍या होने वाली है विदाई!

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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज के चौंकाने वाला बयान देकर खबरों में जगह बनाई है. मध्‍यप्रदेश में आने वालों चुनावों को लेकर प्रदेश में माहौल काफी गर्म चल रहा है. एक तरफ जहां कांग्रेस के नए प्रदेशाध्‍यक्ष कमलनाथ ने चुनावों को लेकर कमर कस ली है तो विरोधी पार्टी भाजपा भी काफी सक्रिय नजर आ रही है. लेकिन मुख्‍यमंत्री शिवराज के एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए एक बयान सवाल खड़ा कर दिया है कि क्‍या मुख्यमंत्री पद से उनकी विदाई होने वाली है. 


भोपाल में आनंद संस्थान के एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दुनिया में कुछ भी परमानेंट नहीं है और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई भी बैठ सकता है. अब ये बात शिवराज सिंह ने क्‍या सोच कर कही ये कोई नहीं जानता लेकिन कहीं उनका इशारा चुनावी साल में नए हेरफेर की तरफ तो नहीं. 



वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज के बयान पर कहा है कि यह हकीकत उनकी समझ में आने लगी है. अभी चुनावों में वक्त है लेकिन शिवराज सिंह अभी से हताश होने लगे है. वहीं शिवराज सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि कुछ नेता प्रदेश में सिर्फ़ चुनाव के समय दिखते है, बाक़ी समय अपने तुग़लकी महलों में बिताते हैं. उनको लगता है कि कॉमन मैन को क्या पता चलेगा. एक फ़िल्म में मैंने सुना था, “नेवर अंडरेस्टिमेट द पावर ऑफ कॉमन मैन.” जनता को पता है कि कौन उनके साथ हमेशा रहा है, और हमेशा रहेगा.



बता दें कि मध्यप्रदेश में इस साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. 15 साल से मध्‍यप्रदेश में बीजेपी की सरकार को इस बार कांग्रेस पूरी तरह से हटाने की कोशिश में जुट गई है. अब देखना ये है कि शिवराज फिर से राज करेंगे या फिर कांग्रेस की लहर इस बार बीजेपी का पत्‍ता साफ करेगी.




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सिंधिया ने किया शिवराज सरकार पर सवाल, मुख्‍यमंत्री बोले- कुछ लोग सिर्फ चुनाव के समय आते हैं नजर

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इंदौर: मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक ही कक्ष में महिलाओं की मौजूदगी में पुरुष नव आरक्षकों (कांस्टेबल) के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कपड़े उतरवाने को कांग्रेस की प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शर्मनाक कृत्य करार दिया है. सिंधि‍या ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश में एक बार फिर सरकारी नुमाइंदों ने लापरवाही की हदें पार की. महिलाओं के सामने पुरुष के कपड़े उतरवाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया. घोर निंदनीय कृत्य, बेहद शर्मनाक. 


सिंधिया के इस ट्वीट के बाद ही मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि कुछ नेता प्रदेश में सिर्फ़ चुनाव के समय दिखते है, बाक़ी समय अपने तुगलकी महलों में बिताते हैं. उनको लगता है कि कॉमन मैन को क्या पता चलेगा.एक फ़िल्म में मैंने सुना था, “नेवर अंडरेस्टिमेट द पावर ऑफ कॉमन मैन...” जनता को पता है कि कौन उनके साथ हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा. 



बता दें कि भिंड में नव आरक्षकों का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण चल रहा था.  उस दौरान एक ही कक्ष में अर्धनग्न स्थिति में पुरुष और दूसरी ओर महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण चलता रहा. महिला नव आरक्षकों के सामने ही पुरुषों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कपड़े उतरवाए गए. इससे पहले धार जिले में आरक्षित वर्ग के नव आरक्षकों के सीने पर स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान एससी और एसटी लिख दिया गया था. इस मामले ने तूल पकड़ा था जिसके बाद प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए. 




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Wednesday, May 2, 2018

MP मुख्‍यमंत्री के ट्वीट का कमलनाथ ने दिया जवाब, बोले- 13 वर्ष से रटा रटाया बोल रहे हैं शिवराज

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भोपाल: मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस ने हाल ही में प्रदेश अध्‍यक्ष के पद पर कमलनाथ को कमान सौंपी है. इस ताजापोशी के बाद से ही कमलनाथ काफी एक्‍ट‍िव नजर आ रहे हैं. प्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने एक ट्वीट करते हुए कमलनाथ पर निशाना साधा तो कमलनाथ ने भी ट्वीट करके उन्‍हें पलटकर तगड़ा जवाब दिया. 


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि कुछ लोग 15 मिनट क्या, 15 साल भी लगातार बोलें तो भी उनके अलावा किसी को समझ नहीं आएगा.



इसके जवाब में कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए पोस्‍ट किया कि शिवराज ने सही कहा कुछ लोग 15 साल भी लगातार बोले तो भी उनके अलावा किसी को समझ नहीं आएगा. आज मध्यप्रदेश की यही स्थिति है, शिवराज लगातार 13 वर्ष से रटा रटाया ही बोल रहे हैं, समझ में किसी को कुछ नहीं आ रहा है. धरातल पर कुछ नहीं.



बता दें कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि प्रदेश का हर वर्ग बीजेपी सरकार से परेशान हो चुका है. कमलनाथ ने राज्य सरकार के कृषि पर दिए जाने वाले आंकड़ों पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की 75 फीसदी अर्थव्यस्था कृषि पर निर्भर है. सरकार जीडीपी के आंकड़ों से जनता को गुमराह करने में लगी है. अब जनता गुमराह नही होगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान आत्महत्या कर रहा है और सरकार कह रही है कि कृषि पुरस्कार मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों समेत नौजवानों के लिए भी चुनौती है.




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