शरद यादव की सदस्यता मामला : कोर्ट की सलाह, बेंच से सुनवाई कराने के लिए अलग से दाखिल करें याचिका
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ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर वर्ष 2015 में अमेरिका एवं पांच विश्वशक्तियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिली थी.
भारत दौरे पर पहुंचे इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से नई दिल्ली में एक मुलाकात के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली : दक्षिणी दिल्ली के सफदरजंग एनक्लेव के हुमायूंपुर गांव में एक छोटे मकबरे को मंदिर में तब्दील किए जाने का मामला दिनों-दिन तूल पकड़ता जा रहा है. उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के जांच के आदेश जारी करने के बाद अधिकारियों के बयान सामने आ रहे हैं. इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर अमित कुमार का कहना है, '1920-30 के काग़ज़ात के हिसाब से यह मकबरा है लेकिन मेरे लिए यह एक आकृति है, यह आकृति 500 साल पुरानी है इसलिए काफी खास है.'
उन्होंने कहा, 'पिछले 7-8 महीने में हमारी टीम 5-6 बार लोकेशन पर गई थी लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गुबंद उनकी निजी संपत्ति का हिस्सा है. उन्होंने बताया कि लोगों के पास इस गुबंद को बनवाने और रिवेन्यु रिकॉर्ड्स भी उनके पास हैं.' इसलिए वो इसे संरक्षित करने और अन्य कार्रवाई करने में असमर्थ हैं.
In 7-8 months our team visited 5-6 times for conservation, with state archaeology team & Police, but locals say its personal property as they've revenue records: A.Kumar, Director-Projects, Indian Ntn'l Trust for Art & Cultural Heritage (INTACH) on structure in Humayunpur #Delhi pic.twitter.com/PUNwr0P7hr
— ANI (@ANI) May 5, 2018
1929-30 document calls it tomb,to me it is a structure & its value is that its 500 yrs old: Amit Kumar,Director-Projects, INTACH(in white) on structure in Humayunpur village; locals say,'structure has been a temple for as long as we can remember,it was re-painted recently' #Delhi pic.twitter.com/HBdwozfSpH
— ANI (@ANI) May 5, 2018
स्थनीय लोगों ने बताया मंदिर
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए हुमायूंपुर गांव के लोगों ने दावा किया है कि यहां पर मंदिर ही थी. कुछ लोगों ने कहा कि जब से उन्हें याद है यहां पर मंदिर ही था. स्थानीय लोगों ने कहा कि यहां पर मंदिर ही था, जिसकी रंगाई और साज-सज्जा का काम कुछ दिनों पहले ही खत्म हुआ है.
मनीष सिसोदिया ने दिए जांच के आदेश
इस मामले में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग ( एसीएल ) की सचिव को शनिवार तक रिपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया. यह मामला खबरों में आने के बाद सिसोदिया का यह आदेश आया है. उप मुख्यमंत्री ने सचिव को दिए अपने आदेश में कहा कि धरोहर संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ है और एक गंभीर अपराध है. सचिव (एसीएल) घटना के ब्योरे और उनके द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है.
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दक्षिणी दिल्ली के हुमायूंपुर गांव में 15वीं शताब्दी में बनी एक सांस्कृतिक धरोहर पर कुछ वक्त पहले ग्रामीणों द्वारा सालों से मंदिर होने का दावा किया गया. बताया जा रहा है कि मात्र दो महीने पहले यह एक छोटा गुंबद था, जिसे गुमटी के नाम से जाना जाता है. यह गुंबद तुगलक काल का है और दिल्ली सरकार की ओर से नोटिफाई ऐतिहासिक इमारत है. काफी वक्त से यह गुबंद जर्जर हालात में था, लेकिन दो महीने पहले कुछ ग्रामीणों ने इस गुंबद को सफेद और केसरिया रंग में रंगवा दिया, इसके बाद मूर्ति रखकर इसमें पूजा करने लगे. इसके बाद से ही इस बात को लेकर
क्या कहते हैं पुरातत्व विभाग के दस्तावेज
रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टेट अर्बन डिवेलपमेंट के 2010 के नोटिफिकेशन में गुमटी गुंबद को 767 ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल किया गया है, पुरातत्व विभाग ने इस गुमची को 15वीं शताब्दी की ऐतिहासिक इमारत बताया है. दस्तावेजों के अनुसार यह गुंबद तुगलक या लोदी वंश के समय बनवाई गई थी.
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 05 May 2018 10:39 AM IST
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रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस का कहना है आरोपी को धर दबोच लिया गया है और तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
A 3-year-old girl allegedly raped by a 20-year-old man in Bhosari. Accused allegedly threatened the family to kill them if they approached the police. Police case registered, accused arrested & has been sent to 3-day police custody. Further investigation underway. #Maharashtra
— ANI (@ANI) May 5, 2018
सियोल: उत्तर कोरिया ने शनिवार (5 मई) को अपनी घड़ी की सुइयां आधा घंटा आगे बढ़ाते हुए अपना टाइम जोन दक्षिण कोरिया के टाइम जोन के अनुरूप कर लिया. उत्तर कोरिया ने यह कदम दोनों देशों के बीच सुलह की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए उठाया है. समाचार एजेंसी योनहाप के मुताबिक, टाइम जोन में यह बदलाव उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन को यह बताने के एक सप्ताह बाद हुआ है कि वह अंतर कोरियाई सुलह और एकता को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के टाइम जोन्स को एक करना चाहते हैं. यह फैसला आधी रात से प्रभावी हुआ.
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने एक बयान जारी कर कहा, "प्रेसिडयम ऑफ द सुप्रीम पीपुल्स असेंबली ऑफ उत्तर कोरिया के आदेश के मुताबिक, प्योंगयांग के समय को पुनर्निर्धारित किया गया है और यह पांच मई से प्रभावी हो गया. बयान के मुताबिक, "उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच ऐतिहासिक बैठक के बाद दोनों देशों के टाइम जोन को एक करना पहला व्यवहारिक कदम है."
उत्तर कोरिया ने अगस्त 2015 में अपने मानक समय को दक्षिण कोरिया के समय के 30 मिनट पीछे कर दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि ऐसा 1910-1945 के बीच जापान के कोरियाई प्रायद्वीप पर शासन के निशानों को हटाने के लिए किया गया. इससे पहले दोनों कोरियाई देशों में एक समान मानक समय ही था.
ट्रंप 22 मई को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से मिलेंगे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 22 मई को व्हाइट हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन से मुलाकात करेंगे. दोनों नेताओं की यह मुलाकात ट्रंप की किम जोंग उन से होने जा रही मुलाकात से पहले हो रही है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा हकाबी सैंडर्स ने जारी बयान में कहा, "दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी मुलाकात अमेरिका, दक्षिण कोरिया के मजबूत होते संबंधों और गहरी होती दोस्ती को दर्शाता है."
समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, ट्रंप और मून कोरियाई प्रायद्वीप के संदर्भ में विभिन्न मुद्दों पर समन्वय बनाए रखेंगे और 27 अप्रैल को हुए अंतर कोरियाई सम्मेलन और किम जोंग के साथ ट्रंप की आगामी बैठक पर चर्चा करेंगे. इससे पहले शुक्रवार (4 मई) को ट्रंप ने कहा था कि किम जोंग उन के साथ मुलाकात का समय और तारीख निर्धारित कर ली गई है और जल्द ही इसके बारे में सूचित किया जाएगा.