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Thursday, May 3, 2018

संयुक्त राष्ट्र का अमेरिका से आग्रह- ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे

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संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं .  इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वह 12 मई तक फैसला करेंगे कि इस समझौते से अमेरिका जुड़ा रहेगा या नहीं.


गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं. " इजरायल ने हाल ही में खुफिया परमाणु दस्तावेजों का खुलासा कर ईरान पर दुनिया की नजरों से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने का आरोप लगाया था. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ओबामा के समय में हुआ परमाणु समझौता झूठ के पुलिंदों पर बना था.


फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी सहमत हैं कि ईरान के साथ मौजूदा परमाणु समझौता उसे परमाणु हथियार तैयार करने से रोकने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है. गौरतलब है कि ईरान ने 2015 में अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले में अपने परमाणु कार्यक्रम रोकने को तैयार हो गया था. 


अमेरिका ने की ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा
अमेरिका ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर ईरान के खिलाफ मंगलवार (18 जुलाई) को नये प्रतिबंधों की घोषणा की. इस कार्यक्रम को वह पश्चिम एशिया के आतंकी समूहों को तेहरान की मदद के तौर पर देखता है.विदेश विभाग की ओर से घोषित प्रतिबंधों में 18 व्यक्तियों या संस्थाओं को निशाना बनाया गया है, जिन्हें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या रिपब्लिकन गार्ड का समर्थक समझा जाता है.


इससे पहले अमेरिका ने सोमवार (17 जुलाई) को कहा था कि ईरान दो वर्ष पहले अमेरिका और अन्य वैश्विक ताकतों के साथ किये गए ऐतिहासिक परमाणु करार का अनुपालन कर रहा है. हालांकि उसने साथ ही आगाह किया था कि नये प्रतिबंधों पर काम किया जा रहा है.




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Tuesday, May 1, 2018

संयुक्त राष्ट्र ने म्यामां को रोहिंग्या के आरोपों की ‘उचित जांच’ कराने को कहा

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नेपीदाः संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक दूत ने मंगलवार (1 मई) को कहा कि म्यामां को मुस्लिम रोहिंग्या लोगों के कथित उत्पीड़न की ‘उचित जांच’ करानी चाहिए. इसके पहले संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधियों के एक दल ने उस क्षेत्र का दौरा किया जहां से करीब सात लाख रोहिंग्या मुस्लिमों को भगा दिया गया था. इसकी शुरुआत पिछले साल अगस्त में हुई थी. संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधियों ने अपनी दो दिवसीय म्यामां यात्रा के दौरान रखाइन प्रांत का भी दौरा किया. दल ने म्यामां की नेता आंग सान सूची के साथ ही सेना के अधिकारियों से भी मुलाकात की.


संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटिश राजदूत करेन पीयर्स ने संवाददाताओं से कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए उचित जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पूरी जांच के लिए दो तरीके हैं. एक अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय है जबकि दूसरा तरीका यह है कि म्यामां सरकार खुद ही व्यापक जांच कराए. इसके पहले प्रतिनिधिमंडल ने बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों का भी दौरा किया.


रोहिंग्या मुसलमानों पर कार्रवाई के दौरान रेप की घटनाएं नहीं हुईः म्यामां सेना प्रमुख
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधियों को राजधानी नाएप्यीदाव में संबोधित करते हुए म्यामां के सेना प्रमुख ने इस बात से इनकार किया कि उनके बलों ने रोहिंग्या मुसलमानों पर कार्रवाई के दौरान बलात्कार या यौन उत्पीड़न की घटनाओं को अंजाम दिया था.  सीनियर जनरल मिन आंग हलैंग उस सेना के प्रमुख हैं जिस पर संयुक्त राष्ट्र ने बलात्कार और असैन्यों की हत्याएं करने समेत ‘‘ नस्ली सफाए ’’ का आरोप लगाया है. अगस्त 2017 में शुरू हुए रोहिंग्या विरोधी अभियान में उनके गांव जला दिए गए और अत्याचार किए गए. इसके चलते करीब 7,00,000 रोहिंग्या अल्पसंख्यकों को बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ी. 



संकट के कई महीने बाद भी संरा प्रतिनिधियों को म्यामां में प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई थी . ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधियों का यह पहला दौरा है जिसमें वह मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सम्मानजनक और सुरक्षित वापसी के लिए दबाव बनाएंगे. कल प्रतिनिधिमंडल ने सेना प्रमुख से मुलाकात की. देश के सभी सुरक्षा मामलों का नियंत्रण उनके हाथों में है , निर्वाचित सरकार का इसमें ज्यादा दखल नहीं है. 


सोमवार को अपने आधिकारिक फेसबुक पेज के माध्यम से उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से कहा, ‘‘ तात्मादाव ( सेना ) हमेशा अनुशासित रहती है और कानून तोड़ने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करती है. ’’ बांग्लादेश में शरणार्थी रोहिंग्या महिलाओं और लड़कियों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं लेकिन सेना प्रमुख ने कहा कि उनके बलों का ‘‘ यौन उत्पीड़न का कोई इतिहास नहीं है. ’’ उन्होंने कहा , ‘‘ हमारे देश की संस्कृति और धर्म के मुताबिक यह स्वीकार्य नहीं है ,’’ जो भी ऐसे अपराधों का दोषी पाया जाएगा उसे सजा मिलेगी. 


उन्होंने दोहराया कि म्यामां उन शरणार्थियों को वापस लेने के लिए तैयार है जिनका निवासी के रूप में सत्यापन हो चुका है. लेकिन समझौता होने के कई महीने बाद भी किसी शरणार्थी की वापसी नहीं हो पायी है. इससे बांग्लादेशी अधिकारी गुस्से में हैं , उनका आरोप है कि म्यामां अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के साथ सहयोग करने का दिखावा कर रहा है. मिन आंग हलैंग ने सीमा पार से आए अवैध आव्रजकों को ‘ बंगाली ’ कहकर संबोधित किया और हिंसा के लिए ‘ आतंकियों ’ को दोषी ठहराया. 




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