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Thursday, May 3, 2018

केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से SC/ST एक्ट संबंधी अपने फैसले पर रोक लगाने का किया आग्रह

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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट को लेकर दिए निर्णय पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार गुरुवार को कोर्ट से अनुरोध किया. इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इन समुदायों के अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रति अत्याचार करने के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने का सौ फीसदी हिमायती है. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इस मामले में न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया. 


उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ऐसे नियम या दिशानिर्देश नहीं बना सकती जो विधायिका द्वारा पारित कानून के विपरीत हों. वेणुगोपाल ने अनुसूचित जाति - जनजाति कानून से संबंधित मामले में शीर्ष अदालत के फैसले को वृहद पीठ को सौंपने का अनुरोध करते हुये कहा कि इस व्यवस्था की वजह से जानमाल का नुकसान हुआ है. 


यह भी पढ़ेंः SC/ST कानून पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए अध्यादेश का मसौदा तैयार कर रहा है केंद्र


पीठ ने अपने 20 मार्च के फैसले को न्यायोचित ठहराते हुये कहा कि अनुसूचित जाति - जनजाति कानून पर अपनी व्यवस्था के बारे में निर्णय करते समय शीर्ष अदालत ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं और फैसलों पर विचार किया था. 


पीठ ने कहा कि वह सौ फीसदी इन समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने और उनपर अत्याचार के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने के पक्ष में है. केन्द्र ने अनुसूचित जाति - जनजाति ( अत्याचारों की रोकथाम ) कानून , 1989 के तहत तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधानों में कुछ सुरक्षात्मक उपाय करने के शीर्ष अदालत के 20 मार्च के फैसले पर पुनर्विचार के लिये दो अप्रैल को न्यायालय में याचिका दायर की थी. 


शीर्ष अदालत ने 27 अप्रैल को केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने का निश्चय किया था परंतु उसने स्पष्ट कर दिया था कि वह इस मामले में और किसी याचिका पर विचार नहीं करेगी. यही नहीं , न्यायालय ने केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर फैसला होने तक 20 मार्च के अपने निर्णय को स्थगित रखने से इंकार कर दिया था. इस फैसले के बाद अनुसूचित जाति और जनजातियों के अनेक संगठनों ने देश में दो अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया था जिसमें आठ व्यक्तियों की जान चली गयी थी. 


(इनपुट भाषा से)




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संयुक्त राष्ट्र का अमेरिका से आग्रह- ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे

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संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं .  इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वह 12 मई तक फैसला करेंगे कि इस समझौते से अमेरिका जुड़ा रहेगा या नहीं.


गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं. " इजरायल ने हाल ही में खुफिया परमाणु दस्तावेजों का खुलासा कर ईरान पर दुनिया की नजरों से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने का आरोप लगाया था. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ओबामा के समय में हुआ परमाणु समझौता झूठ के पुलिंदों पर बना था.


फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी सहमत हैं कि ईरान के साथ मौजूदा परमाणु समझौता उसे परमाणु हथियार तैयार करने से रोकने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है. गौरतलब है कि ईरान ने 2015 में अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले में अपने परमाणु कार्यक्रम रोकने को तैयार हो गया था. 


अमेरिका ने की ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा
अमेरिका ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर ईरान के खिलाफ मंगलवार (18 जुलाई) को नये प्रतिबंधों की घोषणा की. इस कार्यक्रम को वह पश्चिम एशिया के आतंकी समूहों को तेहरान की मदद के तौर पर देखता है.विदेश विभाग की ओर से घोषित प्रतिबंधों में 18 व्यक्तियों या संस्थाओं को निशाना बनाया गया है, जिन्हें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या रिपब्लिकन गार्ड का समर्थक समझा जाता है.


इससे पहले अमेरिका ने सोमवार (17 जुलाई) को कहा था कि ईरान दो वर्ष पहले अमेरिका और अन्य वैश्विक ताकतों के साथ किये गए ऐतिहासिक परमाणु करार का अनुपालन कर रहा है. हालांकि उसने साथ ही आगाह किया था कि नये प्रतिबंधों पर काम किया जा रहा है.




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