Showing posts with label नतओ. Show all posts
Showing posts with label नतओ. Show all posts

Saturday, May 5, 2018

परमाणु समझौते पर इजरायल ने खोला ईरान के खिलाफ मोर्चा, नेतन्याहू की पीएम मोदी सहित कई नेताओं से वार्ता

[ad_1]





ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर वर्ष 2015 में अमेरिका एवं पांच विश्वशक्तियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिली थी.





परमाणु समझौते पर इजरायल ने खोला ईरान के खिलाफ मोर्चा, नेतन्याहू की पीएम मोदी सहित कई नेताओं से वार्ता

भारत दौरे पर पहुंचे इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से नई दिल्ली में एक मुलाकात के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)







[ad_2]

Source link

Friday, May 4, 2018

Time Match of North Korea and South Korea । ZEE जानकारीः दोनों नेताओं की मुलाकात के एक हफ्ते बाद North और South Korea समय भी मिला

[ad_1]

पिछले हफ़्ते North Korea और South Korea ने अपनी 68 साल पुरानी दुश्मनी को भूलकर एक दूसरे से हाथ मिलाया था. अब करीब एक हफ़्ते बाद इन दोनों देशों ने अपनी घड़ियां मिला ली हैं. North Korea और South Korea के रिश्तों वाली घड़ी 68 वर्षों से रुकी हुई थी. लेकिन, अब वक़्त बदल गया है. दीवार पर टंगी दो घड़ियों की ये तस्वीर 29 अप्रैल 2018 की है. ये उसी Peace House की तस्वीर है, जहां North Korea के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और South Korea के राष्ट्रपति Moon Jae-in की मुलाकात हुई थी. अगर आप दोनों घड़ियों को ध्यान से देखेंगे, तो ये पाएंगे, कि दोनों के समय में आधे घंटे का अंतर है. 


बांई तरफ की घड़ी South Korea के मुताबिक 11 बजकर 45 मिनट का समय दिखा रही है. जबकि दांई तरफ की घड़ी में North Korea के मुताबिक 11 बजकर 15 मिनट का समय दिख रहा है. अब आधे घंटे के इस फर्क की वजह को समझिए. किम जोंग उन.. ने वर्ष 2015 में Pyongyang Time बनाया था. इसके तहत North Korea ने अपना मानक समय South Korea से 30 मिनट पीछे कर लिया था. यानी पिछले 3 वर्षों से North Korea का समय South Korea से आधे घंटे पीछे चल रहा था. 


किम जोंग उन.. ने ये फैसला इसलिए लिया था, क्योंकि उपनिवेश काल से पहले North Korea का यही Time Zone, हुआ करता था. सन 1910 से लेकर 1945 तक North Korea पर जापान का शासन था. और उस वक्त जापान ने North Korea के Time को Tokyo के बराबर करने के लिए उसे आधा घंटा आगे कर दिया था. वर्ष 1945 में जापान के अधिकार क्षेत्र से बाहर आने के बावजूद, North Korea का Time Zone वर्ष 2015 तक नहीं बदला गया. फिर किम जोंग उन.. ने इस समय को अपने इतिहास के मुताबिक ठीक किया.


27 अप्रैल 2018 को जिस वक्त नॉर्थ और साउथ कोरिया के नेताओं की हंसती-मुस्कुराती तस्वीरें दुनिया देख रही थीं. उस वक्त किम जोंग उन थोड़े उदास थे. क्योंकि, जिस कमरे में बैठकर वो South Korea के राष्ट्रपति का इंतज़ार कर रहे थे, उसी कमरे की दीवार पर ये दोनों घड़ियां टंगी हुई थीं. Media रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन ने उस दिन ये कहा था, कि दीवार पर टंगी हुई घड़ियों में Seoul Time और Pyongyang Time देखकर उन्हें बहुत पीड़ा हुई. और उसी वक्त उन्होंने ये फैसला किया, कि दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए, घड़ियों का समय मिलाना ज़रुरी है.


North Korea की आधिकारिक समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, किम जोंग उन ने South Korea के Time Zone के हिसाब से वक्त मिलाने के लिए, अपने देश की घड़ियों को 30 मिनट आगे करने का फैसला लिया. वहां की संसद ने भी South Korea के Time Zone को अपनाने पर अपनी मंज़ूरी दे दी थी. और अब से कुछ देर पहले दोनों देशों की घड़ियों का वक्त एक जैसा हो गया है. North Korea का समय भारत के मुकाबले 3 घंटे आगे चलता है. इसलिए वहां पर तारीख बदल चुकी है, वहां पर 5 मई की तारीख शुरू हो चुकी है. 


South Korea ने किम जोंग उन के इस फैसले की तारीफ की है और कहा है, कि इस प्रतीकात्मक कदम से दोनों देशों के रिश्ते और भी ज़्यादा मज़बूत होंगे. इसके लिए South Korea ने भी एक अहम फैसला लिया है. जिसके तहत, वो अपने सीमावर्ती इलाकों में North Korea के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले Loudspeakers को हटा लेगा. इन दोनों ही देशों ने, Propaganda करने के लिए अपनी सरहदों पर सैकड़ों लाउडस्पीकर्स लगाए हुए हैं. लेकिन अब इस समस्या का समाधान भी निकाल लिया गया है.




[ad_2]

Source link

Thursday, May 3, 2018

नेताओं के दलितों के घर भोजन करने से BJP सांसद नाराज, बताया बहुजन समाज का ‘अपमान’

[ad_1]

लखनऊ: देश में राजनेताओं द्वारा दलितों के घरों में खाना खाने के बढ़ते चलन के बीच बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने इसे दिखावा और बहुजन समाज का ‘अपमान‘ करार दिया है. वरिष्ठ बीजेपी नेताओं द्वारा हाल में दलितों के घर में खाना खाए जाने के बारे में पूछे गये सवाल पर बहराइच लोकसभा सीट से सांसद सावित्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भारत के संविधान में जाति व्यवस्था को खत्म करते हुए सबको बराबर की जिंदगी जीने का अधिकार दिया है, लेकिन आज भी अनुसूचित जाति के प्रति लोगों की मानसिकता साफ नहीं है.


उन्होंने कहा ‘इसीलिए लोग उनके घर में खाना खाने तो जाते हैं लेकिन उनका बनाया हुआ खाना नहीं खाते. उनके लिए बाहर से बर्तन आते हैं, बाहर से खाना बनाने वाले आते हैं, वे ही परोसते भी हैं. दिखावे के लिए दलित के दरवाजे पर खाना खाकर फोटो खिंचवाई जा रही है और उन्हें व्हाट्सअप, फेसबुक पर वायरल किए जाने के साथ-साथ टीवी चैनलों पर चलवाकर वाहवाही लूटी जा रही है. इससे पूरे देश के बहुजन समाज का अपमान हो रहा है.’  पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा द्वारा एक दलित के घर में रात्रि भोज पर जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था, जहां आरोप लगे थे कि मंत्री अपनी तरफ से भोजन और पानी लेकर वहां पहुंचे थे.



'दलित के हाथ का बना हुआ खाना खाएं'
सावित्री ने कहा कि बात तो तब हो जब दलित के हाथ का बनाया हुआ खाना खाएं और खुद उसके बर्तनों को धोएं. उन्होंने कहा कि अगर अनुसूचित जाति के लोगों का सम्मान बढ़ाना है तो उनके घर पर खाना खाने के बजाय उनके लिये रोटी, कपड़े, मकान और रोजगार का इंतजाम किया जाए. हम सरकार से मांग करते हैं कि वह अनुसूचित जाति के लोगों के लिये नौकरियां सृजित करे. केवल खाना खाने से अनुसूचित जाति के लोग आपसे नहीं जुड़ेंगे.क्या वह इस मुद्दे को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के सामने रखेंगी, इस सवाल पर पार्टी सांसद ने कोई साफ जवाब नहीं दिया.


सावित्री ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के लोगों को आज भी हीन भावना से देखा जाता है. मैं सांसद हूं और मुझे बीजेपी सांसद के बजाय दलित सांसद कहा जाता है. देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दलित राष्ट्रपति कहा जाता है. क्या यह अनुसूचित जाति के लोगों का अपमान नहीं है. 


'आज आंबेडकर प्रतिमा को तोड़ा जा रहा है'
उन्होंने कहा कि इस नजरिए से आज भी संविधान को नहीं माना जा रहा है. अगर संविधान को उसकी मूल भावना से लागू कर दिया जाए तो देश में गैर बराबरी और जाति व्यवस्था खुद ब खुद ही खत्म हो जाएगी. आज आंबेडकर प्रतिमा को तोड़ा जा रहा है और उसे खंडित करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हो रही है. घोड़ी चढ़ने पर दलित की हत्या की जा रही है.


इससे पहले पिछले महीने सांसद सावित्री ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित काशीराम स्मृति उपवन में 'भारतीय संविधान व आरक्षण बचाओ महारैली का आयोजन' कर सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी थी.


(इनपुट - भाषा)




[ad_2]

Source link

लोग नेताओं के ऑफिस के निकट प्रदर्शन के लिए क्यों नहीं आ सकते : सुप्रीम कोर्ट

[ad_1]





लोगों के प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता देने वाले सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसले हैं. 




[ad_2]

Source link