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Thursday, May 3, 2018

World Press Freedom Day: Know How Many Journalist Lost Their Lives In India - World Press Freedom Day: विश्व रैंकिंग में फिसला भारत, 7 सालों में इतने पत्रकारों ने गंवाई जान

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वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे पूरी दुनिया में आज मनाया जा रहा है। दुनियाभर की नामचीन हस्तियां इस मौके पर पत्रकारों को बधाई दे रही हैं। वैश्विक संगठन यूनेस्को ने ट्वीट कर लिखा- पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। बिना सुरक्षित पत्रकारिता के सुरक्षित सूचना हो नहीं सकती। बिना सूचना के कोई आजादी नहीं होती। आज और रोजाना प्रेस की आजादी के लिए खड़े हों। 


भारत में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। मगर हमारे देश में पत्रकारों की स्थिति पिछले कुछ सालों के दौरान बदतर हुई है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की 180 मजबूत देशों की सूची में भारत तीन पायदान फिसलकर 136वें नंबर पर आ गया है। इससे पहले भारत 133वें स्थान पर था। इस सूची में पहले नंबर पर जहां नॉर्वे है, वहीं दक्षिण कोरिया सबसे नीचे पायदान पर मौजूद है। पूरी दुनिया में इस समय 193 पत्रकार जेल में हैं। 

भारत के पिछले सात सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो परिस्थिति चिंताजनक बनी हुई है। साल 2012 में 74, 2013 में 73, 2014 में 61, 2015 में 73, 2016 में 48, 2017 में 46 और साल 2018 में अब तक 14 पत्रकारों ने काम के दौरान अपनी जान गंवाई है। यानी सात सालों में 389 पत्रकारों की जान केवल भारत में गई है।

दुनिया पत्रकारों के लिए नर्क वाली जगह बन चुकी है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 21 देशों को काले रंग में दिखाया गया है। जिसका मतलब है कि इन देशों में प्रेस की आजादी बहुत खराब है। वही 51 देशों को खराब स्थिति वाले वर्ग में रखा गया है। 

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पत्रकारों को प्रेस फ्रीडम की बधाई देते हुए लिखा है- आज भारतीय पत्रकारों के लिए कठिन समय है। ईमानदार और संतुलित आवाजों को झूठ से दबा दिया जाता है। यह बहुत जरूरी है कि हमारे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत बनाया जाए और इसे और निडर बनाने के लिए योगदान दिया जाए।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी पत्रकारों को सूचना का महत्वपूर्ण जरिया बताया है। उन्होंने लिखा- मुक्त और ईमानदार प्रेस लोकतंत्र के रीढ़ है। प्रेस हमेशा से दुनिया भर में सूचना, आलोचना और संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इसलिए प्रेस की स्वतंत्रता आवश्यक है। 
 





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Wednesday, May 2, 2018

Who Said, North India Has The Foulest Air In The World - आखिर उत्तर भारत की हवा इतनी जहरीली क्यों है? Who ने किया खुलासा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 03 May 2018 09:51 AM IST



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तेजी से बढ़ता प्रदूषण भारत की सबसे बड़ी समस्या है। WHO के मुताबिक साल 2016 में दुनिया के 20 शहरों में की गई स्टडी में से 14 शहरों में प्रदूषण का स्तर 2.5 पीएम मापा गया और ये शहर भारत के हैं। इन शहरों में जोधपुर 14वें, राजस्थान-गया चौथे, पटना 5वें और मुजफ्फरपुर 9वें नंबर पर है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान और कश्मीर दुनिया में सबसे ज्यादा खराब हवा के लिए जाना जाता है।  

इसके अलावा दिल्ली, आगरा, कानपुर, वाराणसी, मुजफ्फरपुर, गया और श्रीनगर में भी वायु प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा है। ये सभी उन 14 शहरों में शामिल हैं जहां सबसे ज्यादा प्रदूषण है। आईआईटी कानपुर के साइंस एक्सपर्ट प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने कहा कि हम एक दशक से इस बारे में स्टडी कर रहे हैं और इसमें कुछ भी नया और आश्चर्यचकित करने वाला नहीं है। 

वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्त्रोत पीएम(पार्टिकुलेट मैटर) को माना गया है। जिसमें नाइट्रेट, सल्फेट और काले कार्बन जैसे प्रदूषक शामिल हैं। प्रदूषित शहरों में पहले नंबर पर कानपुर है। फरीदाबाद, वाराणसी, गया, पटना, दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुरुग्राम, जयपुर, पटियाला और जोधपुर भी इस लिस्ट में शामिल हैं। 

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, धरती पर 10 में से 9 लोग सांस के रूप में प्रदूषित हवा लेते हैं, और इससे हर साल 7 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है। हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर से लगभग एक चौथाई मौत की वजह वायु प्रदूषण ही होता है। 



तेजी से बढ़ता प्रदूषण भारत की सबसे बड़ी समस्या है। WHO के मुताबिक साल 2016 में दुनिया के 20 शहरों में की गई स्टडी में से 14 शहरों में प्रदूषण का स्तर 2.5 पीएम मापा गया और ये शहर भारत के हैं। इन शहरों में जोधपुर 14वें, राजस्थान-गया चौथे, पटना 5वें और मुजफ्फरपुर 9वें नंबर पर है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान और कश्मीर दुनिया में सबसे ज्यादा खराब हवा के लिए जाना जाता है।  


इसके अलावा दिल्ली, आगरा, कानपुर, वाराणसी, मुजफ्फरपुर, गया और श्रीनगर में भी वायु प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा है। ये सभी उन 14 शहरों में शामिल हैं जहां सबसे ज्यादा प्रदूषण है। आईआईटी कानपुर के साइंस एक्सपर्ट प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने कहा कि हम एक दशक से इस बारे में स्टडी कर रहे हैं और इसमें कुछ भी नया और आश्चर्यचकित करने वाला नहीं है। 

वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्त्रोत पीएम(पार्टिकुलेट मैटर) को माना गया है। जिसमें नाइट्रेट, सल्फेट और काले कार्बन जैसे प्रदूषक शामिल हैं। प्रदूषित शहरों में पहले नंबर पर कानपुर है। फरीदाबाद, वाराणसी, गया, पटना, दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुरुग्राम, जयपुर, पटियाला और जोधपुर भी इस लिस्ट में शामिल हैं। 

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, धरती पर 10 में से 9 लोग सांस के रूप में प्रदूषित हवा लेते हैं, और इससे हर साल 7 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है। हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर से लगभग एक चौथाई मौत की वजह वायु प्रदूषण ही होता है। 





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