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Thursday, May 3, 2018

Pakistan parliament passed resolution to rename university department named after first Nobel laureate Abdus Salam

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Publish Date:Fri, 04 May 2018 08:19 AM (IST)



नई दिल्ली (जेएनएन)। पाकिस्तान में इस्लाम न मानने वालों अथवा इस्लाम से जबरन खारिज किए गए लोगों के साथ किस कदर बदसलूकी होती है और उस पर वहां की नेशनल एसेंबली यानी संसद भी मुहर लगाने में संकोच नहीं करती, इसका एक शर्मनाक प्रमाण गुरुवार को तब फिर मिला जब इस एसेंबली ने अहमदिया समुदाय के नोबल विजेता वैज्ञानिक प्रो अब्दुस सलाम के प्रति घोर असम्मान जताते हुए कायदे आजम विश्वविद्यालय में उनके नाम पर रखे गए नेशनल फिजिक्स सेंटर यानी फिजिक्स डिपार्टमेंट से उनका नाम हटाने के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव मंजूर होने की खबर मिलते ही विवि ने उनका नाम तत्काल प्रभाव से हटा भी दिया। इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इसे याद रखा जाना चाहिए कि पाकिस्तान दो राष्ट्र के सिद्धांत पर बना था। प्रस्ताव की ऐसी भाषा पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए खतरनाक मानी जा रही है। एक अजीब बात यह भी है कि यह प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद कैप्टन सफदर लाए थे। सबसे शर्मनाक यह रहा कि यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद पाकिस्तान की सिविल सोसाइटी के लोग और कई पत्रकार, मानवाधिकारवादी अपने सांसदों को कोसने में लगे हुए हैं। ज्यादातर का स्वर यही है कि इस मुल्क का कुछ नहीं हो सकता।




अब्दुस सलाम की बेकदरी करने वाला यह प्रस्ताव इसलिए भी हैरानी भरा रहा, क्योंकि इस्लामाबाद के कायदे आजम विश्वविद्यालय के फिजिक्स डिपार्टमेंट का नाम अब्दुस सलाम के नाम पर रखने का फैसला 2016 में नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते समय लिया गया था। इस विवि के फिजिक्स डिपार्टमेंट को अब्दुस सलाम का नाम दिए जाने की पहल पाकिस्तान की सिविल सोसाइटी और खासकर शिक्षक, वैज्ञानिक आदि एक अर्से से कर रहे थे। अब्दुस सलाम के नाम को फिजिक्स डिपार्टमेंट से खारिज करने के नेशनल एसेंबली के फैसले को अल्पसंख्यकों की अनदेखी और उपेक्षा के बढ़ते सिलसिले के तौर पर देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि हाल के समय में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं।





अब्दुस सलाम को जब नोबेल पुरस्कार मिला था तो उन्हें यह सम्मान पाने वाले पहले मुस्लिम वैज्ञानिक के तौर पर देखा गया था। वह पाकिस्तान के एक मात्र ऐसे वैज्ञानिक रहे हैं जिन्हें नोबेल सम्मान मिला, लेकिन उन्हें अपने ही देश में कदम-कदम पर बेइज्जत किया गया। यह सिलसिला उनकी मौत के बाद भी जारी रहा। पहले उनकी कब्र में उनके नाम से यह उल्लेख हटा दिया गया कि वह मुस्लिम हैं और अब उनके नाम वाले फिजिक्स डिपार्टमेंट का नया नामकरण कर दिया गया। पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को 1974 में बाकायदा संविधान संशोधन के जरिये इस्लाम से खारिज कर दिया गया था। इसके बाद से उनकी प्रताड़ना का वैसा ही सिलसिला कायम है जैसा पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों का है। अहमदिया समुदाय की मस्जिदों पर हमले होना आम बात है। उन्हें हर तरह के दमन का शिकार तो होना ही पड़ता है, उन्हें यह भी इजाजत नहीं कि वे अपने को मुस्लिम कहें।


कुछ समय पहले जब “गॉड पार्टिकल” की खोज हुई थी तो दुनिया भर में अब्दुस सलाम को याद किया गया था, क्योंकि इस खोज की शुरुआती आधारशिला उन्होंने ही रखी थी। जब सारी दुनिया की वैज्ञानिक बिरादरी अब्दुस सलाम का स्मरण कर रही थी तब पाकिस्तान में किसी ने उनका नाम तक नहीं लिया। पाकिस्तान का यह रवैया इतना हैरानी भरा था कि इसका जिक्र सीएनएन के एक खास कार्यक्रम में किया गया।


पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में अल्पसंख्यकों के प्रति नफरत को बयान करने वाले आए प्रस्ताव में कायदे आजम विवि के फिजिक्स डिपार्टमेंट से अब्दुस सलाम का नाम हटाकर खगोलशास्त्री अबू अल फतह अब्दुल रहमान का नाम जोड़ने का फैसला किया गया है। अब पाकिस्तान के आम लोग यह जानने में लगे हुए हैं कि यह महाशय कौन हैं और आखिर इनका पाकिस्तान से क्या ताल्लुक है?


By Nancy Bajpai




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Aligarh Muslim University is closed for five days, UP Government has ordered to Magistrate inquiry

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नई दिल्ली/अलीगढ़ : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूनियन हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी होने का मामला कम होने का नाम नहीं ले रहा है. एएमयू में हंगामे के दूसरे दिन गुरुवार (03 मई) को भी छात्रों ने हंगामा किया. बाबा-ए-सैयद गेट पर छात्रों ने फिर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और एएमयू का तराना भी गाया गया. जानकारी के मुताबिक, मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों को भी आक्रोशित छात्रों ने निशाना बनाया. हालात को देखते हुए एएमयू को पांच दिनों के लिए बंद कर दिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. योगी सरकार ने एएमयू में हुए बवाल के बाद मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं.


दूसरे दिन हंगामे के बाद लिया फैसला
एएमयू प्रशासन ने पांच दिनों के लिए सभी कक्षाएं बंद कर दी है. विश्वविद्यालय ने ये फैसला छात्रों के द्वारा दूसरे दिन हुए फैसले के बाद लिया. वहीं पुलिस-प्रशासन और आरएसएस विरोधी पोस्टर लगाने के दौरान भी एएमयू छात्र पुलिस से जूझते नजर आए. 


पुलिस बल मौजूद
यूनिवर्सिटी के चारों ओर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया. जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को भी कुछ छात्र एएमयू पहुंचे और सरकार विरोधी नारेबाजी की. पुलिस फोर्स छात्रों के हर मूवमेंट पर नजर रख रही है. 


एडीएम सिटी को सौंपा ज्ञापन
गुरुवार (03 मई) को कुछ छात्रों ने एडीएम सिटी को ज्ञापन दिया. इस ज्ञापन में उन्होंने हिंदूवादी नेताओं और सांसद सतीश गौतम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.


मामले की होगी मजिस्ट्रेट जांच 
मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर हुए बवाल के बाद सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी किए हैं. एडीएम फाइनेंस बच्चू सिंह पूरी घटना की जांच करेंगे. आपको बता दे कि बुधवार (2 मई) को हुए हंगामे के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मजिस्ट्रेट जांच की मांग की थी.  


क्यों मचा हंगामा
जिन्ना का विवाद बीजेपी सांसद और एएमयू कोर्ट मेंबर सतीश गौतम के सोमवार (30 अप्रैल) को एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को पत्र लिखने से शुरू हुआ. सांसद ने पत्र में पूछा था कि किन कारणों से जिन्ना की तस्वीर लगी है और कहां-कहां?. उन्होंने लिखा था कि जिन्ना भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के मुख्य सूत्रधार थे. इस पत्र के सुर्खियां बनने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जिन्ना की तस्वीर को लेकर बवाल शुरू हो गया.




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Wednesday, May 2, 2018

Aligar Muslim University Jinnah portrait Swami Prasad Maurya calls Mahapurush Harnath Singh

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कानपुर: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के स्टूडेंट यूनियन ऑफिस में पाकिस्तानी संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. जिन्ना विवाद को लेकर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कानपुर में कहा कि जिन्ना भारत के महान पुरुष थे. बंटवारे से पहले जिन्ना का भी देश के लिए योगदान था. अपनी पार्टी के सांसदों और अन्य नेताओं पर हमला बोलते हुए मौर्य ने कहा, ' चाहे उनकी ही पार्टी के सांसद या विधायक क्यों न हो ऐसी बयानबाजी करने वालों को वे घटिया किस्म का मानते हैं, क्योकि देश के बंटवारे के पहले जिन्ना का भी योगदान रहा है.'


मौर्य देशवासियों से अपने बयान के लिए माफी मांगे
स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान पर नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने कहा कि उनके इस कृत्य से उत्तर प्रदेश सरकार और बीजेपी की छवि पर देश के अंदर बहुत बड़ा धक्का लगा है. उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी,  सीएम योगी आदित्यनाथ, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे को ट्वीट करते हुए कहा कि अपने बयान के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य देशवासियों से माफी मांगे, अन्यथा उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से निकाल दिया जाए.


मौर्य का पार्टी से मोहभंग हो चुका है- हरनाथ सिंह
हरनाथ सिंह ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य का बीजेपी से मोहभंग हो चुका है. शायद, उन्होंने अपने लिए नए ठिकाने तलाश लिए है, इसलिए ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं. बता दें, पिछले दिनों स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि मायावती का शासनकाल, योगी आदित्यनाथ के शासनकाल से बेहतर था. मौर्य के मुताबिक मायावती के राज में भ्रष्टाचार पर लगाम रहता है.


AMU देशद्रोहियों का अड्डा रहा है- हरनाथ सिंह
हरनाथ सिंह यादव AMU में जिन्ना की तस्वीर को लेकर कहा कि यह जघन्य अपराध में आता है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से AMU देशद्रोही गतिविधियों का अड्डा रहा है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की.


 



 


इस विवाद को लेकर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि जो मुसलमान भारत में रह रहे हैं, उन्होंने जिन्ना की सोच और बंटवारे के फैसले को कभी स्वीकार नहीं किया. इसलिए, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जिन्ना की तस्वीर को जरूर हटा देना चाहिए. 


आडवाणी को जिन्ना की तारीफ करने पर देना पड़ा था इस्तीफा
2005 में लालकृष्ण आडवाणी का पाकिस्तान दौरा हर किसी को याद होगा. उस दौरे में लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना को घर्मनिरपेक्ष नेता कहा था. अपने बयान की वजह से आडवाणी को पार्टी के अध्यक्ष पद से तुरंत इस्तीफा देना पड़ा था.


अलीगढ़ के सांसद सतीष गौतम की चिट्ठी के बाद शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब स्थानीय बीजेपी सांसद सतीष गौतम ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को चिट्ठी लिखकर पूछा कि, क्या AMU के छात्रसंघ कार्यालय में पाकिस्तानी संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है? अगर, जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है तो किस विभाग में लगी है और किन कारणों से लगी है वह बताएं. साथ में यह भी पूछा था कि AMU में जिन्ना की तस्वीर का लगा होना कितना तार्किक है?




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