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Friday, May 4, 2018

यूपी में स्‍कूल की मनमानी, मंत्री के इंतजार में 8 घंटे तक भूख से बिलखते रहे बच्‍चे

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नई दिल्‍ली : उत्‍तरप्रदेश के बहराइच जिले में स्‍कूल प्रबंधन का अमानवीय चेहरा सामने आया है. यहां के एक स्‍कूल ने राज्‍य की मंत्री के कार्यक्रम में भीड़ को दिखाने के लिए पहले छोटे छोटे बच्‍चों को बुला लिया. फिर कार्यक्रम में देरी पर उन्‍हें 8 घंटे तक भूखा बिठाए रखा. इस दौरान सभी बच्‍चे कार्यक्रम में भूख से बिलखते रहे. लेकिन जब इस मामले के बारे में मीडिया में खबरें आईं तो सभी अपनी-अपनी जिम्‍मेदारी से पल्‍ला झाड़ते नजर आए. कोई भी इस मामले में जवाब देने के लिए तैयार नहीं है.


एएनआई के अनुसार, शुक्रवार को बहराइच के एक स्‍कूल में यूपी सरकार में मंत्री अनुपमा जयसवाल का एक कार्यक्रम था. कार्यक्रम रात 8 बजे शुरू होना था, लेकिन स्‍कूली बच्‍चों को दोपहर 12 ही बुला लिया गया. जब तक कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ इन बच्‍चों को ऐसे ही भूखा बिठाए रखा गया. बाद में कई बच्‍चों ने रोते हुए इस बात की शिकायत की. मीडिया में ये खबर आते ही सभी ने अपने अपने तर्क देने शुरू कर दिए.



इस मामले पर जब मंत्री अनुपमा जयसवाल से पूछा गया तो उन्‍होंने कहा, ये कार्यक्रम पहले से इसी समय तय था. मुझे नहीं पता कि इन बच्‍चों को 8 घंटे तक क्‍यों कार्यक्रम में बिठाया गया. इसके लिए जिम्‍मेदार टीचर्स को जवाब देना चाहिए.हालांक‍ि इस पूरे मामले में अभी तक स्‍कूल प्रशासन की ओर से कुछ भी नहीं कहा गया है. न ही अब तक ये बताया गया है क‍ि इसके लिए ज‍िम्‍मेदार लोगों पर क्‍या कार्रवाई हो रही है.




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Thursday, May 3, 2018

स्कूली बस पर नहीं, कश्मीरियों के तालीम के सपने पर हमला है

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कश्मीर के शोपियां में स्कूली बच्चों की बस पर पत्थरबाजी की घटना जितनी दुखद और जघन्य है, उतनी ही आश्चर्यजनक भी है. क्योंकि तालीम को लेकर कश्मीर का मिजाज अलग है. एक आम कश्मीरी अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी तालीम देना चाहता है, उसे अच्छे से अच्छे स्कूल में भेजना चाहता है. जो लोग कश्मीर से वाकिफ हैं वे इस बात को बखूबी जानते हैं. जो वहां नहीं गए हैं, उन्हें जानकर ताज्जुब होगा कि अगर आप श्रीनगर में घूमने निकल जाएं तो इंग्लिश मीडियम या कानवेंट कल्चर के स्कूलों की अच्छी तादाद दिखाई देगी. आमतौर पर कश्मीरी लोग भले ही पारंपरिक परिधान फिरन, एक लंबा सा चोगा, पहने नजर आएं, लेकिन जब पढ़ाई की बात आती है तो वे मदरसों को नहीं, इंग्लिश मीडियम स्कूल या सरकारी स्कूलों का रुख करते हैं. 


कई कानवेंट स्कूलों की इमारतें और सुविधाएं देखकर आप को लगेगा कि आप देहरादून के मशहूर स्कूलों को देख रहे हैं. स्कूली बच्चों के परिधान पारंपरिक नहीं होते हैं. लड़के लड़कियां पेंट शर्ट या स्कर्ट टॉप के साथ नीले या हरे रंग का ब्लेजर पहने दिखेंगे. हां, लड़कियां सिर पर पारंपरिक स्कार्फ जरूर लगाती हैं. उनके पास वैसे ही भारी स्कूल बैग होंगे जैसे देश के बाकी शहरी इलाकों के बच्चों के कंधों पर टंगे रहते हैं. चिनार के ऊंचे दरख्तों के साए में जब कोई स्कूली बस आपके बगल से गुजरती है और उसमें से सेब से लाल गालों वाले बच्चों का हल्ला-गुल्ला सुनाई देता है तो कश्मीर के भविष्य की बहुत आश्वस्तकारी तस्वीर जेहन में उभरती है.


आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि सेना ने यहां के दूरदराज इलाकों में जितने स्कूल खोले हैं उन सब में बच्चों का दाखिला कराने के लिए अभिभावकों में होड़ लगी रहती है. और सबसे ज्यादा दिलचस्प नजारा तो श्रीनगर में बने सेना के मुख्यालय के सामने रहता है. सबसे ज्यादा सुरक्षा इंतजाम और सबसे ज्यादा आतंकवादी खतरे का अंदेशा झेलने वाले इस मुख्यालय में सेना का स्कूल भी है. इस स्कूल में बच्चे का दाखिला कराने के लिए कश्मीर के आम आदमी से लेकर रसूखदार लोगों तक में होड़ लगी रहती है. लेखक जब कुछ महीने पहले कश्मीर गया था तो सेना के एक अफसर ने बताया था कि वे ऐसे बहुत से अलगावादियों को जानते हैं जिन्होंने बड़ी सिफारिशें लगाकर सेना के स्कूल में अपने बच्चों का दाखिला कराया है. जब बात बच्चों के भविष्य की आती है तो अलगावादियों को भी सेना के स्कूल और नई तरह की तालीम पर ज्यादा भरोसा रहता है.


आपको ऐसे बहुत से कश्मीरी मिल जाएंगे जो हायर एडुकेशन के लिए अपने बच्चों का देश के दूसरे हिस्सों में भेजना चाहते हैं. देश की बहुत सी यूनिवर्सिटीज में आपको ऐसे कश्मीरी छात्र मिल जाएंगे जो भारत सरकार की उड़ान स्कीम तहत यहां पढ़ रहे हैं. एक बार एक उम्रदराज कश्मीरी ने लेखक से कहा था कि वह चाहता है कि उसके बच्चे इस खुली जेल से बाहर निकलें और बाकी भारत के बच्चों को देखें. वहां के रहन-सहन और तौर-तरीके समझें. वे महसूस तो करें कि वे सड़कें कैसी होती हैं जिनकी चौकीदारी के लिए हमेशा बखतरबंद वर्दी पहने हथियारबंद सिपाही तैनात नहीं होते. और उसे अच्छी तरह पता है कि इस खुली जेल से रिहाई की अगर कोई पहली सीढ़ी है तो वह है तालीम. इसीलिए कश्मीर में कभी स्कूली बच्चों को आतंकवादियों का निशाना नहीं बनना पड़ा.


स्कूली बस पर पत्थरबाजी कर अलगावादियों ने आम कश्मीरी की हसरतों पर हमला किया है. यह हमला अगर एक चुनौती है तो एक बड़ी संभावना भी है. संभावना इस रूप में कि भारत के सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ वर्षों में बंदूके के दम पर सेना पार से चल रहे आतंकवाद को बुरी तरह कुचला है. इसके तोड़ में पाकिस्तान ने भारत में रह रही अपनी स्लीपर सेल को सक्रिय किया है. पिछले कुछ महीने में मारे गए ज्यादातर आतंकवादी विदेशी न होकर भारतीय मूल के हैं. 


जाहिर है स्थानीय होने के कारण इन्हें स्थानीय सहानुभूति भी मिलती है. लेकिन बच्चों पर हमले के बाद अगर भारत सरकार मानवीय संवाद को बढ़ावा दे तो इस सहानुभूति का रुख आतंकवादियों के बजाय भारत राष्ट्र की तरफ हो सकता है. यह संकट को अवसर में बदलने का मौका है. पत्थरबाजों की चोट से लहुलुहान मां बाप को यह भी बताने का मौका है कि वे अपने बच्चों को तालीम का रास्ता दिखाना चाहते हैं और अलगाववादी उन्हें तालिबान के रास्ते ले जाना चाहते हैं. लेकिन ये बातें सेना नहीं सांस्कृतिक संवाद से समझाई जा सकती है.




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Wednesday, May 2, 2018

कश्मीर में पत्थरबाजों ने स्कूल बस को भी नहीं बख्शा, पथराव में बच्चे के सिर में आई गंभीर चोट

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जम्मू-कश्मीर के शोपियां में पत्थरबाजों की भीड़ ने बुधवार को एक स्कूल बस पर हमला कर दिया। इस घटना में एक दूसरी कक्षा का बच्चा घायल हो गया। घायल लड़के को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने उसके सिर पर गंभीर चोट बताई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना की निंदा की है। बता दें कि एक महीने पहले पत्थरबाजों ने टूरिस्ट बस पर हमला किया था। इसमें 4 लोग जख्मी हुए थे।


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स्कूल बस पर पथराव, 2 बच्चे घायल, राजनीतिक दलों ने बताया शर्मनाक

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श्रीनगर : जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में बुधवार की सुबह कुछ अराजक तत्वों ने एक स्कूल बस पर पथराव किया, जिसमें दो बच्चे घायल हो गए. यह घटना जावोरा गांव में हुई. घायल बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों ने एक बच्चे को विशेष इलाज के लिए श्रीनगर रैफर कर दिया. घटना के वक्त बस में करीब 50 बच्चे सवार थे और स्कूल जा रहे थे. राज्य की मुख्यमंत्री समेत अन्य दलों ने घटना की कड़ी निंदा की है. उधर, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.


पुलिस ने बताया कि यह घटना सुबह करीब सवा नौ बजे की है. इस बस में नर्सरी से लेकर 10वीं कक्षा के बच्चे सवार थे. तभी कुछ अराजक तत्वों ने बस को घेर कर उस पर पथराव शुरू कर दिया. इस घटना में दो बच्चे घायल हुए हैं. एक बच्चे के सिर पर पत्थर लगा. दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. एक घायल बच्चा दूसरी कक्षा का छात्र है.



स्कूल बस के ड्राइवर ने बताया कि जैसे ही उसे आभास हुआ कि कुछ गड़बड़ है, उसने बस की स्पीड बढ़ा दी, लेकिन फिर भी पत्थरबाजों ने बस पर हमला कर दिया और बच्चों को चोट आ गई.


इस घटना की सभी तरफ से कड़ी निंदा की जा रही है. घायल बच्चों के अभिभावकों ने इसे मानवता के खिलाफ हरकत बताया है. राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट संदेश में कहा, 'स्कूल की बस पर हमले के बारे में सुनकर अचंभित हूं, गुस्से में हूं, इस शर्मनाक हरकत के लिए ज़िम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.'



उन्होंने कहा कि इस घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं. दोषियों को जल्द से जल्द पकड़कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.



राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि पत्थरबाजों को राहत दी गई थी कि वो सुधर जाएंगे, लेकिन कुछ लोग इसका अब गलत फायदा उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद निंदनीय है. एक अन्य ट्वीट में अब्दुल्ला ने कहा, बच्चों पर पथराव से कैसे इन पत्थरबाजों के एजेंडे को बढ़ाने में मदद मिलती है? इस तरह के हमलों की सभी को मिलकर निंदा करनी चहिए.'


राज्य पुलिस प्रमुख एसपी वैद ने इस घटना को पागलपन बताया है. उन्होंने कहा कि अब छोटे-छोटे बच्चों को निशाना बना रहे हैं, जो कि बहुत शर्मनाक है.




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