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Friday, May 4, 2018

कर्नाटक में पहली बार: 215 सीटों को कवर करने की कोशिश करेंगे मोदी, लिंगायतों का रुख अभी साफ नहीं

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बेंगलुरु. इस बार कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में कई बातें पहली बार हो रही हैं। अगर ये राज्य सत्ताधारी कांग्रेस के हाथ से निकल गया तो पार्टी सिर्फ दो राज्य पंजाब और पुडुचेरी में सिमट कर रह जाएगी। भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव लाते हुए मोदी की रैलियों की संख्या 15 से बढ़ाकर 21 कर दी हैं। कर्नाटक चुनाव में किसी प्रधानमंत्री की ये अब तक की सबसे ज्यादा चुनावी रैलियां होंगी। उधर, सरकार बनाने में अहम रोल निभाने वाले लिंगायत समुदाय ने पहली बार अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं, ऐसा पहली बार हो रहा है कि भाजपा को घेरने के लिए जनता दल सेकुलर और बसपा ने गठबंधन किया है। इस चुनाव में पहली बार क्या हो रहा है?


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Thursday, May 3, 2018

कर्नाटक में लिंगायत बहुल 105 सीटें, इनमें से 44 होंगी निर्णायक; 2013 में इन पर कम अंतर से हुई थी जीत-हार

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कर्नाटक चुनाव में सिर्फ 12 दिन शेष हैं। राज्य की तीन बड़ी पार्टी कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस की निगाहें राज्य के लिंगायत समुदाय पर हैं। असेंबली की कुल 224 सीट में से 105 पर लिंगायत बहुल हैं, इनमें से 44 इस बार निर्णायक हो सकती हैं। इसकी वजह है कि पिछले चुनाव में इन पर उम्मीदवारों की ज्यादा से ज्यादा 10 हजार वोट से हार-जीत हुई है। 2013 चुनाव में इस समुदाय ने कांग्रेस को सपोर्ट किया था। इससे पार्टी को इन 105 सीटों में से 63 पर कामयाब मिली थी। माना जा रहा है कि इसी वजह सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का कार्ड खेला है।


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