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Friday, May 4, 2018

बिहार में पाकिस्तानी बच्ची को बना दिया 'स्वच्छ जमुई स्वस्थ जमुई' का ब्रांड एंबेसडर

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बिहार के जमुई जिले में 'स्वच्छ जमुई स्वस्थ जमुई' की परिकल्पना को साकार करने में जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने अजम काम किया है. जागरूकता फैलाने और इसके प्रचार-प्रसार के लिए एक नोटबुक बनाया गया है. नोटबुक के कवर पेज का ब्रांड एंबेसडर एक पाकिस्तानी बच्ची को बनाया गया है.

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Thursday, May 3, 2018

पाकिस्‍तानी जनरल बाजवा क्‍या भारत की तरफ बढ़ा रहे दोस्‍ती का हाथ?

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अदालती फैसले के चलते नवाज शरीफ के सत्‍ता से बाहर होने के बाद पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा अचानक भारत को लेकर दिए अपने बयानों के कारण सुर्खियों में हैं. ऐसा इसलिए भी क्‍योंकि माना जाता रहा है कि नवाज शरीफ, भारत के साथ संबंध सुधारने के इच्‍छुक थे लेकिन अपनी सेना के कारण वह ऐसा नहीं कर सके. यह भी कहा जाता है कि भारत के साथ दोस्‍ती की चाह के कारण ही उनको सत्‍ता से बेदखल होना पड़ा. लेकिन अब स्‍थान की पूर्ति के लिए पाकिस्‍तान की सबसे ताकतवर शख्सियत के रूप में जनरल कमर जावेद बाजवा सामने आए हैं.


बाजवा सिद्धांत
जनरल बाजवा ने पिछले दिनों कहा कि भारत-पाक के बीच कश्‍मीर समेत सभी विवादों का हल विस्‍तृत रूप से सार्थक बातचीत से ही निकल सकता है. उन्‍होंने ये भी कहा है कि मोदी सरकार अपने सख्‍त रुख के कारण पाकिस्‍तान के साथ अभी बातचीत नहीं कर रही है लेकिन अपनी तेज गति से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था के कारण उसको अगले दो-तीन साल के भीतर पाकिस्‍तान के साथ बातचीत करने की दरकार होगी. इसके साथ ही यह भी उन्‍होंने हाल में कहा है कि पाकिस्‍तान को ऐसे शांतिप्रेमी देश के रूप में स्‍थापित करने का सपना देखते हैं जो दुनिया के साथ शांतिपूर्ण और सह-अस्तित्‍व की भावना के साथ रहना चाहता है. इन सारे बयानों को यदि एक साथ जोड़कर देखा जाए तो इसको पाकिस्‍तानी विदेश नीति के संदर्भ में बाजवा डॉक्ट्रिन(सिद्धांत) कहा जा रहा है. अब बड़ा सवाल उठता है कि आखिर जनरल बाजवा इस तरह के बयान क्‍यों दे रहे हैं?


बयान का मतलब
इसका जवाब लंदन के किंग्‍स कॉलेज में इंटरनेशनल रिलेशंस के प्रोफेसर हर्ष वी पंत ने दैनिक भास्‍कर में लिखे अपने लेख में देते हुए कहा है कि दरअसल जनरल बाजवा यह संकेत दे रहे हैं कि नवाज शरीफ के सीन से हटने के बाद अब पाकिस्‍तानी फौज का पूरी तरह से नियंत्रण है. यानी कि पाकिस्‍तान के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की बातचीत में सेना की भूमिका को नजरअंदाज करना असंभव है. हालांकि वह यह भी कहते हैं कि पाकिस्‍तान में इसी जुलाई-अगस्‍त में आम चुनाव होने वाले हैं और अगले एक साल के भीतर भारत में चुनाव होने वाले हैं. लिहाजा दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में जमी बर्फ फिलहाल पिघलने वाली नहीं है.


‘ट्रैक 2’ की कूटनीति प्रक्रिया बहाल
हालांकि पाकिस्तानी संगठनों द्वारा भारत में बड़ी संख्या में आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आए ठहराव के बीच भारतीय विशेषज्ञों के एक समूह ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा करने और 'ट्रैक 2' की कूटनीति प्रक्रिया को बहाल करने के लिए पाकिस्तान का दौरा किया. कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक मूल ट्रैक 2 पहल ‘नीमराणा संवाद’ को इस दौरे के साथ नई शुरुआत मिली. भारतीय पक्ष की अगुवाई पूर्व विदेश सचिव विवेक काटजू एवं अन्य विशेषज्ञों ने की, जबकि पाकिस्तानी पक्ष में पूर्व मंत्री जावेद जब्बार एवं अन्य शामिल थे. सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच इस्लामाबाद में 28 से 30 अप्रैल के बीच संवाद हुआ.


एक सूत्र के मुताबिक, ''दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दे बातचीत के जरिये सुलझाये जाने चाहिए.'' सूत्रों ने बैठक में चर्चा के विषयों के बारे में और जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने कश्मीर, सियाचिन, सर क्रीक, आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर तनाव तथा अफगानिस्तान सहित क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की.


सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्ष अपने प्रस्ताव विचार के लिए अपनी सरकारों को सौंपेंगे. पाकिस्तानी पक्ष में शामिल विशेषज्ञों में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पूर्व गवर्नर इशरत हुसैन भी थे जिनका नाम जुलाई में संभावित आम चुनाव के दौरान पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के उम्मीदवारों के तौर पर मीडिया में चल रहा है. ट्रैक 2 की वार्ता को पूरी तरह गुप्त रखा गया और आयोजकों ने इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ भी साझा नहीं किया. 1990 के दशक की शुरुआत में नीमराणा संवाद की शुरुआत हुई थी.


साल 2016 में पाकिस्तान के संगठनों द्वारा किये गये आतंकी हमलों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के लक्षित हमलों के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था. दोनों पक्ष अक्सर एक दूसरे पर नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाते हैं. हाल ही में भारत ने कहा था कि वह शंघाई सहयोग संगठन की रूपरेखा के तहत रूस में कई देशों के आतंकवाद निरोधक अभ्यास में पाकिस्तान के साथ भाग लेगा.




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Wednesday, May 2, 2018

पाकिस्तान: PML-N आने वाले चुनावों में 'छिपी ताकतों' के खिलाफ लड़ेगी

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लाहौर: पाकिस्तान में सत्तारूढ़ पार्टी पीएमएल- एन के प्रमुख नवाज शरीफ ने चुनाव अभियान की शुरूआत करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगी बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता से बेदखल करने वाली ‘‘छिपी ताकतों’’ के खिलाफ लड़ेगी. पीएमएल- एन ने एक करोड़ लोगों की आबादी वाले पंजाब प्रांत में अपने चुनाव अभियान के पहले चरण की शुरूआत की. मई के पहले दो सप्ताह में नवाज की पार्टी पूरे प्रांत में 13 रैलियां करेगी. मौजूदा सरकार का कार्यकाल समाप्त होने में केवल एक महीना शेष है.


शरीफ ने मंगलवार(1 मई) शाम साहिवाल (लाहौर से करीब 200 किलोमीटर दूर ) में पीएमएल- एन की पहली रैली को संबोधित करते हुए कहा ,‘‘ आने वाले आम चुनावों में हमारा मुकाबला आसिफ अली जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी या इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक - ए - इंसाफ जैसी किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं होगा बल्कि छिपी ताकतों के खिलाफ होगा. ’’ 68 वर्षीय शरीफ ने कहा कि पीएमएल- एन को उन षडयंत्रकारियों को पराजित करना है जो मतपत्रों का सम्मान नहीं करते है.


उन्होंने कहा, हमारा मुकाबला उन ताकतों के खिलाफ है जो जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं लेकिन देश में हर शख्स उन ताकतों के बारे में जानता है. यदि कोई इमरान, जरदारी या निर्दलीय उम्मीदवार को वोट करता है तो वह वास्तव में उन ताकतों (सैन्य प्रतिष्ठान) के लिए वोट करेगा.


सैन्य प्रतिष्ठान पर निशाना साधते हुए शरीफ ने कहा,‘‘ इन ताकतों ने पिछले 70 वर्षों के दौरान पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाया है. अब बहुत हो गया है. अब हमें मतपत्रों और लोगों के जनादेश का सम्मान करके पाकिस्तान को बदलना होगा. पीएमएल- एन लोगों के जनादेश को फिर कायम करेगी.’’


‘‘छिपी ताकतों’’ द्वारा पाकिस्तानी मीडिया पर ‘अघोषित सेंसरशिप’ का जिक्र करते हुए शरीफ ने कहा,‘‘ मैं जानता हूं कि मीडिया दबाव में है. मैं उस तरह की ताकतों की कड़ी निंदा करता हूं जो मीडिया पर दबाव बना रही है. मुझे पता है कि मीडिया पर दबाव बनाने के आदेश कहां से आ रहे हैं.’’ 


इनपुट भाषा से भी 




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